*वाह रे इंसान..........*
घर में निकला चूहा.......
*दवा डाल मार गिराया।*
मन्दिर में माटी के चूहे को.....
*अपना दुःखड़ा बोल आया।*
बच्चे मांगें खिलौने,माँ बाप ने डाँट दिया.....
*मन्दिर की पेटी में दिल खोल चन्दा डाल दिया।*
नहाकर गंगा में,सब पाप धो आया.....
*वहीं से धोये पापों का पानी भर लाया।*
माटी की मूरत से अपनी जिन्दगी की भीख माँग आया.......
*उसी मूरत के सामने जानवर बेजुबान काट आया।*
जिन्दगी भर कौवे को अशुभ मानता आया.......
*फिर मरे माँ बाप को कौआ समझ भोजन करा आया।*
वाह वाह रे इन्सान तरीका......
*तेरा मेरी समझ में न आया।*
🙏 🙏🙏
घर में निकला चूहा.......
*दवा डाल मार गिराया।*
मन्दिर में माटी के चूहे को.....
*अपना दुःखड़ा बोल आया।*
बच्चे मांगें खिलौने,माँ बाप ने डाँट दिया.....
*मन्दिर की पेटी में दिल खोल चन्दा डाल दिया।*
नहाकर गंगा में,सब पाप धो आया.....
*वहीं से धोये पापों का पानी भर लाया।*
माटी की मूरत से अपनी जिन्दगी की भीख माँग आया.......
*उसी मूरत के सामने जानवर बेजुबान काट आया।*
जिन्दगी भर कौवे को अशुभ मानता आया.......
*फिर मरे माँ बाप को कौआ समझ भोजन करा आया।*
वाह वाह रे इन्सान तरीका......
*तेरा मेरी समझ में न आया।*
🙏 🙏🙏
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